बक्सर का युद्ध (1764) – Baksar Ka Yuddh Kahan Hua Tha

दोस्तों आज इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे Baksar Ka Yuddh के बारे में जोकि आधुनिक भारत इतिहास के अंतर्गत आता है. हम आज Baksar Ka Yuddh के घटनाओं कारण परिणाम महत्त्व निष्कर्ष इस लेख में देखेंगे जो सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अति महत्वपूर्ण रहेगा इस लेख को पूरा अंत तक पढे. इस लेख में मै बक्सर का युद्ध (1764) से सम्बंधित आपको पांच टॉपिक को कवर करेंगे एक-एक कर के चलिए जान लेते है वह कौन-कौन सा पांच टॉपिक है.

  • बक्सर का युद्ध की घटनाक्रम
  • युद्ध के घटनाओ के कारणों
  • बक्सर युद्ध के कारण
  • बक्सर युद्ध के परिणाम
  • युद्ध के महत्त्व
  • इलाहाबाद की संधि

बक्सर का युद्ध कब और किसके बीच हुआ – Baksar Ka Yuddh Kab Hua

प्रिय स्टूडेंट अब इस लेख में Baksar Ka Yuddh कब हुआ था और किसके मध्य लड़ा गया था. जबकि इस लेख में यह भी जानेंगे की Baksar Ka Yuddh की पूरा इतिहास व घटनाक्रम पूरा विस्तार से व भी सबसे आसान भाषा में तो चलिए इस लेख को पूरा अंत तक पढ़ते है.

Baksar Ka Yuddh 22/23 अक्टूबर 1764 में बक्सर के मैदान में लड़ा गया था. यह युद्ध हैक्टर मुनरो ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगल अथवा नवाबों की सेनाओं के मध्य लड़ा गया था. एक ओर बंगाल के नबाब मीर कासिम, अवध के नबाब शुजाउद्दौला, तथा मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की सेनाएं थी तथा दूसरी ओर अंग्रेज कम्पनी की सेना लड़ रही थी। इस युद्ध में अंग्रेजों की विजयी हुई,

जिसके परिणाम स्वरूप बंगाल, बिहार, तथा उड़ीसा का दीवानी और राजस्व अधिकार अंग्रेज कम्पनी के हाथ चला गया. इस युद्ध में अंग्रेजो के लगभग 847 सैनिक तथा दूसरे पक्ष के लगभग 2000 सैनिक मारे गए. युद्ध के मैदान से मीरकासिम को भागना पड़ा था. इधर-उधर 12 वर्ष भटकने के बाद 1777 ई० में उसकी देहांत हो गया.

इसे भी पढ़े: प्लासी का युद्ध (1757)

प्लासी और बक्सर के युद्ध में आप किसे निर्णायक मानते हैं और कारणों का वर्णन करें – Baksar Ka Yuddh Kyon Hua

Baksar Ka Yuddh Kyon Hua

अब इस लेख में यह पढने वाले है Baksar Ka Yuddh Kyon Hua व बक्सर युद्ध के घटनाओ के क्या कारण थे. पूरा विस्तार से तो चलिए जान लेते है इस युद्ध के क्या कारण है.

अंग्रेजों के द्वारा प्लासी का युद्ध जीतने के बाद मीर जाफर को 1757 में बंगाल का नवाब बना दिया जाता है. अंग्रेजों ने प्लासी का युद्ध मीर जाफर को नवाब बनाने के लिए नहीं बल्कि अपने स्वार्थ के लिए लड़ा था, इसलिए मीर जाफर अंग्रेजों का मात्र एक कठपुतली नवाब के रूप में कार्य कर रहा था यानी की मीर जाफर सिर्फ नाम का शासक था. बंगाल की सत्ता वास्तविक रूप से अंग्रेज ही चला रहे थे. धीरे-धीरे अंग्रेजों का स्वार्थ और ज्यादा बढ़ने लगा था परंतु मीर जाफर के रहते हुए वह पूरा नहीं हो पा रहा था.

कुछ समय बाद मीर जाफर का दामाद मीर कासिम बंगाल की सत्ता को प्राप्त करने की इच्छा होती है जिसके बाद उन्होंने अंग्रेजों से बात करता है की अगर वे उसे बंगाल का नवाब बना देता हैं, तो वह उन्हें मीर जाफर से भी अधिक उनको कार्य करने की स्वतंत्रता देगा. अंग्रेजों ने यह प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया

और 1760 में मीर जाफर को हटाकर अंग्रेजो ने मीर कासिम को बंगाल का नवाब बना दिया. परंतु अंग्रेजों ने जैसा सोचा था की मीर कासिम को नवाब बनाने के बाद उनका कार्य और ज्यादा आसान हो जाएगा वैसा कुछ भी नहीं हुआ क्योकि अंग्रेजों से मीर कासिम ने जैसा वादा किया था उसने उसके विपरीत ही अपने कार्यों को किया.

अंग्रेजों की इच्छा थी की मीर कासिम भी मीर जाफर की तरह ही उनकी कठपुतली की तरह कार्य करेगा, लेकिन मीर कासिम एक योग्य नवाब था. जिसके कारण उसने अंग्रेजों के बताए हुए कार्य को ना करके अपनी स्थिति को मजबूत बनाने का प्रयास किया. जब मीर कासिम ने अंग्रेजों के बताये अनुसार कार्य नहीं किया तो अंग्रेजों ने उन्हें पद से हटाने का सोचा और उन्होंने 1763 ईस्वी में मीर कासिम के स्थान पर पुनः मीर जाफर को नवाब बनाया. इसके बाद मीर कासिम व अंग्रेजों के बीच कई जगहों पर झड़प होती रही.

1763 ईस्वी में ही पटना में हुए एक हत्याकांड में मीर कासिम ने अनेक अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया थ. जिसके कारण अंग्रेजों ने मीर कासिम से बदला लेने के लिए उन्हें ढूंढने लगा. इस समय मीर कासिम अवध के नवाब शुजाउद्दौला के पास शरण लिया हुआ था और यहां से ही उन्होंने शुजाउद्दौला और तत्कालीन मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध लड़ने का निश्चय किया.

बक्सर युद्ध के कारण का वर्णन करें – Baksar Ka Yuddh Ke Karanon Ki Vyakhya Kijiye

भारतीय आधुनिक इतिहास के महत्वपूर्ण टॉपिक Baksar Ka Yuddh के बारे में विस्तार से पढ़ रहे है. अब इस लेख में यह बताने वाले है की बक्सर के युद्ध के क्या-क्या कारण है और एक-एक पॉइंट के माध्यम से पढ़ेंगे.

  • मीर जाफर का शासन
  • डच का आक्रमण
  • मीर कासिम को नवाब घोषित
  • मीर कासिम की कठिनाइयां
  • मीर जाफर का पुनः बंगाल का नवाब बनना
  • मीर कासिम शुजा उड दौलाह शाह आलम का गठबंधन और बक्सर का युद्ध

मीर जाफर का शासन

मीर जाफर बड़ा ही संकीर्ण व्यक्ति था नायाब बनते ही उसने हिंदू राजाओं के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया. अंग्रेजों ने भी मीरे जाफर को हिंदुओं के विरुद्ध भड़काया एवं फूट डालो एवं शासन करो की नीति का क्रियान्वयन किया. मीर जाफर ने बिहार के नयाब सूबेदार राजा राम नारायण जोकी अलीवर्दी खान और सिराजुद्दौला का शुभचिंतक था.

को अंग्रेजों के साथ मिलकर हटा दिया इस सेवा के बदले अंग्रेजों को मीरजाफर से वर्धमान और हुगली की मालगुजारी वसूल करने का अधिकार मिला. रामनारायण के बाद रॉबर्ट क्लाइव और मीर जाफ़र ने उड़ीसा के हिंदू नरेश रामसिंह को भी उखाड़ फेंका.

डच का आक्रमण

मीर जाफर हमेशा से डच एवं अंग्रेजों के तरफ से आशंकित था. मीर जफर अंग्रेजों को दान दे दे कर के परेशान हो गया था अतः मीर जाफर ने डच के साथ एक संधि कर ली जिसके तहत मीर जाफर ने डच को बंगाल पर आक्रमण करने के लिए उत्तेजित किया. तत्पश्चात 1759 ईस्वी में डचों ने बंगाल पर आक्रमण कर दिया किंतु कर्नल फोड़ ने डचों को वेदरा के युद्ध में पराजित कर दिया. इससे डचों की कमर टूट गई इसके बाद वे उन्हें इस देश की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं कर सके.

मीर कासिम को नवाब घोषित

1757 से 1760 ईस्वी तक जब तक रॉबर्ट क्लाइव बंगाल में रहा उसने अंग बंगाल में अंग्रेजों की प्रभुता बनाए रखें 1760 ईस्वी में रॉबर्ट क्लाइव इंग्लैंड चला गया क्लाइव के बाद हालेवेल गवर्नर बना. इसी बीच मीर जाफर के लड़के मीरन की मृत्यु हो गई. अब प्रश्न था कि मीर जाफर के बाद बंगाल की गद्दी का पर कौन बैठेगा.

अंग्रेज मीर जाफर के व्यवहार से असंतुष्ट थे क्योंकि मीरज़ाफर ने अंग्रेजो के खिलाफ़ डच से सहायता ली थी उधर मीर जाफर भी अंग्रेजों से असंतुष्ट था. क्योंकि वह अंग्रेजों को दान दे दे करके थक चुका था. इस बीच बंगाल में अराजकता की स्थिति आ गई अंग्रेज इसके लिए नवाब को दोषी ठहरा रहे थे. हलवेल ने मीरजाफ़र के दमाद मीर कासिम से सांठगांठ कर लिया और उसे बंगाल की नवाबी देने का प्रलोभन दिया.

मीर कासिम ने बंगाल का नवाब बनने के बदले में कंपनी का पिछला बकाया चुकाने के अतिरिक्त वर्ध मिदनापुर और चटगांव के जिले दे देने का वादा किया. वृद्ध दरिद्र और निर्मल मीर जाफर अंग्रेजों के संयंत्र से उब गया था अतः उसने स्वयं ही गद्दी छोड़ दी मीर कासिम को नवाब घोषित कर दिया गया. इस प्रकार 1760 ईसवी की क्रांति बिना किसी रक्त के सफल हो गई.

मीर कासिम की कठिनाइयां

मीर कासिम स्वतंत्र प्रकृति का व्यक्ति था अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त होना चाहता था उसने मुर्शिदाबाद से अपनी राजधानी हटा ली और मुंगेर को अपनी राजधानी बना उसने मुंगेर की किलेबंदी करवाकर उसे अत्यंत सुदृढ बना दिया और 40000 सैनिकों की एक सेना रख दी उसने अपने दरबार को का खर्च कम कर दिया और उसने अंग्रेज भक्त अधिकारियों को भी बर्खास्त कर दिया.

मुगल शासक फर्रुखसियर के द्वारा सुनहरा फरमान के द्वारा 1717 में दस्तक जारी करने का अधिकार दिया गया था जिसके तहत अंग्रेज बिना किसी शुल्क के व्यापार कर सकते थे अंग्रेजों द्वारा इस दस्तक के अधिकार का दुरुपयोग किया गया मीर कासिम ने इसकी शिकायत कई बार अंग्रेज अधिकारियों से की मगर इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका अंतत मीर कासिम ने दस्तक के विशेषाधिकार को समाप्त कर भारतीय व्यापारियों के लिए भी व्यापार कर मुक्त कर दिया.

इससे अंग्रेजों को जो बढ़त हसीन थी वह समाप्त हो गई इस बीच अपने के हत्याकांड ने अंग्रेजों एवं मीर कासिम के बीच संघर्ष को अवश्यंभावी बना दिया जिसके बाद अंग्रेजों एवं मीर कासिम के बीच में Baksar Ka Yuddh हुआ जिसमें मीर कासिम पराजित हुआ तथा वह भागकर अवध के नवाब शुजाउडदौला के शरण में जा पहुंचा.

मीर जाफर का पुनः बंगाल का नवाब बनना

मीर कासिम की पराजय के पूर्व ही 1763 में मीर जाफर को पुनः बंगाल का नवाब बना दिया गया था. इसके एवज में मीर जाफ़र ने वर्तमान मिदनापुर एवं चंटगांव की जमीनदारी अंग्रेजों को दी थी साथ ही साथ दस्तक के विशेषाधिकार को पुनः प्रभावी बनाया गया.

मीर कासिम शुजा उड दौलाह शाह आलम का गठबंधन और बक्सर का युद्ध

अंग्रेजो के खिलाफ मीर कासिम, शूजा उ दौला और शाह आलम ने गठबंधन कर पटना की घेराबंदी की लेकिन बारिश का मौसम आरंभ होने के कारण राजा उड दौला ने अपनी सेना को बक्सर तक पीछे हटने का आदेश दिया. जिसके बाद बक्सर में ब्रिटिश सेना एवं संयुक्त सेना के बीच Baksar Ka Yuddh हुआ इस युद्ध में ब्रिटिश सेना की विजय हुई.

बक्सर के युद्ध का परिणामों का वर्णन करें – Baksar Ka Yuddh Ke Parinaam Ka Ullekh Kijiye

आधुनिक भारत के इतिहास के अंतर्गत Baksar Ka Yuddh के परिणामों का वर्णन करेंगे जो बहुत ज्यादा बार एग्जाम मे पूछे जाने वाले प्रश्न है. अब इस लेख में इसी टॉपिक पर दिस्कास करेंगे जो के क्या इसका मुख्य परिणाम क्या रहा है.

  • इस युद्ध सें मीर जाफर की नवाबी पक्की हो गई तथा बंगाल पर अंग्रेजों का पूरा अधिकार हो गया.
  • बंगाल के बाहर अवध तथा दक्षिण में उत्तरी सरकार क्षेत्र में अंग्रेजो का प्रभाव बढ़ने लगा.
  • अवध का नवाब शुजाउद्दौला तथा मुगल सम्राट शाहआलम दोनों अंग्रेजों की शरण में आ गए.
  • इस लड़ाई से भारतीय सेना और मुगल साम्राज्य की प्रतिष्ठा में कमी आई तथा ब्रिटिश सेना के प्रभाव और प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई.

बक्सर के युद्ध का महत्व बताइए

प्रिय स्टूडेंट अब इस लेख में भारतीय इतिहास के अंतर्गत Baksar Ka Yuddh के महत्त्व का इतिहास देखेंगे जो इस युद्ध के महत्वपूर्ण घटनाओ में से एक घटना है इसी टॉपिक पर युद्ध के महत्त्व क्या-क्या है.

  • राजनीति दृष्टि से महत्व
  • सैनिक दृष्टि से महत्व

राजनीति दृष्टि से महत्व


राजनीति दृष्टि से महत्व:- प्लासी के युद्ध ने तो बंगाल के नवाब को कलपुतली बनाया. किंतु बक्सर के युद्ध में अंग्रेजो के बंगाल का स्वामी बना दिया. Baksar Ka Yuddh से पहले ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी केवल एक व्यापारिक संस्था थी लेकिन बक्सर के युद्ध के बाद हुई संधि से वह एक शासक कंपनी बन गई.

अब बंगाल तक ही सीमित नहीं रही बल्कि अवध और दिल्ली तक पहुंच गई उनसे दक्षिण के कर्नाटक के युद्ध में फ्रांसीसी को पराजित करके अन्य भारतीय क्षेत्रों को अपने अधीन करना शुरू कर दिया. कंपनी ने मुगल सम्राट से मान्यता देने वाला फरमान प्राप्त करके अपने राजनीतिक लाभ को कानूनी रूप दिलवा लिया.

सैनिक दृष्टि से महत्व

सैनिक दृष्टि से महत्व:- सैनिक दृष्टि से महत्व:- सैनिक दृष्टि से प्लासी का युद्ध तो भगदड़ मात्र ही था. किन्तु बक्सर का युद्ध तो पूरी सैनिक तैयारियों के साथ लड़ा गया था. इसमे छल- कपट से नहीं बल्कि आर्थिल श्रेष्ठता के बल पर अंग्रेज़ों ने विजय प्राप्त की थी. इस प्रकार यह स्पष्ट हों जाता है कि Baksar Ka Yuddh प्लासी के युद्ध की अपेक्षा अधिक निर्णायक था.

FAQ (बक्सर का युद्ध (1764) से सम्बन्धित कुछ सवालो का जवाब)

इस लेख में बक्सर का युद्ध (1764) से सम्बन्धित प्रश्नों का उत्तर जानेंगे जो आपके द्वारा पूछा गया है. सरे प्रश्नों का उत्तर का हल देखेंगे तो चलिए देख लेते है बक्सर के युद्ध के कुछ प्रश्न और उनके जवाब. अगर आपको कोई सवाल पूछना है तो आप हमे कोमेंट के माध्यम से पूछ सकते है.

  • बक्सर का युद्ध का क्या कारण था?
  • बक्सर का युद्ध कब और कहां हुआ?
  • बॉक्सर का युद्ध कब हुआ था?
  • 1764 में बक्सर युद्ध के समय बंगाल का गवर्नर कौन था?
  • बक्सर की लड़ाई किसने लड़ी?
  • बक्सर का युद्ध का क्या कारण था?
  • बक्सर का युद्ध कब और कहां हुआ?
  • बॉक्सर का युद्ध कब हुआ था?
  • 1764 में बक्सर युद्ध के समय बंगाल का गवर्नर कौन था?
  • बक्सर की लड़ाई किसने लड़ी?

बक्सर का युद्ध का क्या कारण था?

हेक्टरो मुनरो के नेतृत्व में अंग्रेज बक्सर के किले पर हमला करने आ गए. 22 अक्टूबर को बक्सर के युद्ध शुरू हुआ तो सिराजुद्दौला के फ़ौज ने अंग्रेजो को बड़े आसानी से तीतर-बितर कर दिया.

उन्हें लगा की हम युद्ध जीत चुके है और उन्होंने अंग्रेजो का समान लूटना शुरू कर दिया. इस स्तिति का फायदा उठाकर हेक्टरो मुनरो ने फ़ौज को जमा किया और किले पर हमला कर दिया किले पर कोई फ़ौज नही था जिसके कारण हेक्टरो मुनरो ने आसानी से किले पर कब्ज़ा कर लिया.

बक्सर का युद्ध कब और कहां हुआ?

बक्सर का युद्ध 22/23 अक्टूबर 1764 ई० को हुआ जो आधुनिक भारत का इतीहास में यह युद्ध बिहार के बक्सर के भूमि पर सिराजुद्दौला लड़ा गया था.

बॉक्सर का युद्ध कब हुआ था?

बक्सर के युद्ध सिराजुद्दौला व अंग्रेजो से युद्ध 22 अक्टूबर 1764 ई० को युद्ध हुआ.

1764 में बक्सर युद्ध के समय बंगाल का गवर्नर कौन था?

1764 में बक्सर के युद्ध के समय बंगाल का गवर्नर रॉबर्ट क्लाइव था. जो युद्ध से विजय के बाद से बंगाल का गवर्नर बना दिया गया.

बक्सर की लड़ाई किसने लड़ी?

गवर्नर हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में अंग्रेज बक्सर के किले पर धवा बोल दिया. आधुनिक भारत का इतिहास में बक्सर के युद्ध 22/23 अक्टूबर को यह युद्ध बक्सर में लड़ा गया था. जिसमे अंग्रेजो का विजय हुआ. यह युद्ध हेक्टर मुनरो व सिराजुद्दौला के सेनाओ युद्ध हुआ.

निष्कर्स

प्रीय स्टूडेंट अब इस लेख में मै आपको बक्सर के युद्ध के क्या घटनाक्रम रहा सरे टॉपिक जो इस लेख में आपको बताने वाले है.

निष्कर्स:- आधुनिक भारत के इतिहास के अंतर्गत बक्सर युद्ध 22/23 अक्टूबर 1764 ई० को बक्सर का युद्ध अंग्रेज और बंगाल के नवाब मीर कासिम अवध के नवाब और सिराजुद्दौला तथा मुगल बादशाह द्वितीय के समिलित सेनाओ के मध्य हुआ अंग्रेजी सेना का नेतृत्व कर हेक्टर मुनरो द्वारा किया गया था.

इस बक्सर के युद्ध में अंग्रेजो का जीत हुई और पूर्ण बंगाल अंग्रेजो का अधीन हो गया और दोनों पक्षो में इलाहबाद की संधि इस संधि का परिणाम स्वरूप अंग्रेजों को काफी भरकम जुर्माना दिया गया और बिहार बंगाल और उड़ीसा वास्तविक रुप से अंग्रेजों के अधीन आ गया साथ ही मीर जफर को फिर से नवाब बना दिया गया.

इस लेख में बक्सर के युद्ध का क्या-क्या घटनाओ व कारण और परिणाम क्या रहा सारे टॉपिक को देख चुके है. जो आपके एग्जाम के लिए अति महत्वपूर्ण है. अगर आपने अभी तक Baksar Ka Yuddh क्या-क्या रहा है. अभी जाकर पूरा इतिहास पढ़ ले इस लेख में आधुनिक भारत का इतिहास के अंतर्गत बक्सर का युद्ध के बारे में बताया गया है.

Leave a Comment